मन निर्मल दर्पण की भांति है सुख शांति। मन सागर पीड़ा गोताखोर लाई कविता। मन निर्मल दर्पण की भांति है सुख शांति। मन सागर पीड़ा गोताखोर ...
रिश्तों की गहराई है, एक दूसरे की परछाई है। रिश्तों की गहराई है, एक दूसरे की परछाई है।
मन के दर्पण में महक उठा मेरा जीवन। मन के दर्पण में महक उठा मेरा जीवन।
तुमसे बोला तो हमको है ऐसा लगा खुद कहे खुद सुने ये कहानी नयी। तुमसे बोला तो हमको है ऐसा लगा खुद कहे खुद सुने ये कहानी नयी।
नादान प्राणी अब भी समझ ले, मन शरीर का दर्पण हैं, दर्पण झूठ नहीं कहता। नादान प्राणी अब भी समझ ले, मन शरीर का दर्पण हैं, दर्पण झूठ नहीं कहता।
मन के भीतर हमारे कहां ये झांक पाता है। मन के भीतर हमारे कहां ये झांक पाता है।